Teja Dashami 2025: कब है तेजा दशमी? जानें तिथि, व्रत विधि और इसका धार्मिक महत्व

तेजा दशमी 2025 (Teja Dashami 2025)

भारत एक धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से भरा हुआ देश है, जहाँ हिन्दू धर्म में देवी-देवताओं के पूजा के साथ में लोक देवताओ की पूजा का भी विशेष महत्व है| हमारे भारत में सालभर अलग-अलग व्रत और अनेक त्यौहार मनाए जाते हैं। इन्हीं में से एक है तेजा दशमी (Teja Dashami), जिसे भगवान तेजाजी महाराज के सम्मान में मनाया जाता है। यह पर्व विशेष रूप से राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तर भारत के अनेक हिस्सों में बड़ी श्रद्धा, भक्ति और समर्पण के साथ मनाया जाता है।

तेजा दशमी का दिन व्रत, पूजा और भक्ति से जुड़ा होता है, जिसका संबंध लोक आस्था और धार्मिक परंपराओं से अत्यंत गहराई से जुड़ा हुआ है। आइए जानते है कि 2025 में तेजा दशमी कब है, तिथि, महत्व, व्रत विधि और तेजाजी महाराज की कथा के बारें में| 

“तेजा दशमी के पावन अवसर पर भगवान तेजाजी महाराज की कृपा से आपके जीवन में सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और शांति बनी रहे। आपके घर में सदा खुशियों का वास हो और हर संकट से रक्षा हो। तेजा दशमी की हार्दिक शुभकामनाएँ!”

तेजा दशमी 2025 कब है? (When is Teja Dashami 2025?)

हमारे हिंदू पंचांग के अनुसार तेजा दशमी का त्योहार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की दशमी को मनाया जाता है।

तेजा दशमी 2025 की तिथि क्या है?(Date of 2025 Teja Dashami):

इस साल 2025 में तेजा दशमी (Teja Dashami) 2 सितम्बर, मंगलवार को मनाई जायेगी।

तेजा दशमी का महत्व क्या है? (What is the significance of Teja Dashami?)

इसका सीधा संबंध लोकदेवता वीर तेजाजी महाराज (Veer Tejaji Maharaj) से है, जिन्हें नागों के देवता और लोक रक्षक माना जाता है। तेजाजी महाराज ने अपना जीवन सत्य, धर्म और न्याय की रक्षा के लिए बहुत ही संघर्ष पूर्ण व्यतीत किया| आइए जानते है इसके महत्व के बारें में:

  • इस दिन महिलाएँ अपने परिवार की सुख-समृद्धि और संतान की लंबी उम्र के लिए व्रत करती हैं।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में इसे नाग-देवता की पूजा से भी जोड़ा जाता है, क्योंकि तेजाजी को साँपों के देवता के रूप में पूजा जाता है।
  • यह पर्व सामाजिक और धार्मिक दृष्टि से लोगों को एकता, भाईचारे और आस्था से जोड़ता है।
  • वीर तेजाजी को विशेष रूप से किसान और पशुपालक बड़ी श्रद्धा से पूजते हैं, क्योंकि मान्यता है कि उनकी पूजा करने से पशुधन स्वस्थ रहता है।
  • लोग कठिन परिस्थितियों में तेजाजी से मनोकामना माँगते हैं और मन्नत पूरी होने पर उनके स्थान पर ध्वजा चढ़ाते हैं।

तेजा दशमी व्रत विधि (Teja Dashami Vrat Vidhi)

यह व्रत बड़ी ही आस्था, विश्वास और सादगी से किया जाता है। आइए जानते है इस दिन की व्रत विधि के बारें में:

  • सुबह स्नान और संकल्प– इस व्रत को रखने वाली महिलाएँ प्रातः जल्दी स्नान कर व्रत का संकल्प लेती हैं।
  • साफ-सुथरा स्थान चुनें– घर में स्वच्छ स्थान पर या मंदिर में वीर तेजाजी महाराज की तस्वीर या मूर्ति को स्थापित करें।
  • पूजन सामग्री– हल्दी, रोली, चावल, धूप, दीपक, जल, फूल, नारियल और प्रसाद तैयार करें।
  • भगवान तेजाजी की पूजा– सबसे पहले तेजाजी महाराज को जल अर्पित करें, फिर दीपक जलाकर उनकी पूजा करें।
  • कथा श्रवण– इस दिन वीर तेजाजी की कथा सुनना या पढ़ना विशेष रूप से बहुत ही शुभ माना जाता है।
  • व्रत का नियम– दिनभर उपवास रखा जाता है और शाम को पूजा करने के बाद व्रत का समापन किया जाता है।
  • दान-पुण्य– व्रत के बाद ज़रूरतमंदों को भोजन या वस्त्र दान करना बेहद शुभ माना जाता है।

तेजा दशमी की कथा (Teja Dashami Katha)

पौराणिक कथाओं के अनुसार, तेजाजी महाराज राजा बक्साजी और रामकुंवर के पुत्र थे। वे बचपन से ही वीर, साहसी, न्यायप्रिय और असाधारण गुणों वाले थे। छोटी-सी उम्र में ही उनके पराक्रम को देखकर लोग आश्चर्यचकित रह जाते थे। 

एक बार तेजाजी अपने साथी के साथ अपनी बहन पेमल को लेने के लिए उसके ससुराल गए। वहाँ जाकर उन्हें पता चला कि मेणा नामक डाकू उसकी ससुराल की सारी गायों को लूटकर ले गया। उन्होंने अपनी बहन की सहायता के लिए निश्चय किया कि वे सभी गायों को छुड़ाकर वापस घर लाएंगे।

गायों को वापस लाने के लिए जब तेजाजी अपने साथी भाया के साथ जंगल से गुजर रहे थे, तभी रास्ते में एक बांबी के पास भाषक नामक नाग उनके घोड़े के सामने आ गया और उन्हें डसने की कोशिश करने लगा। तेजाजी ने नाग से रास्ता छोड़ने को कहा, पर वह तैयार नहीं हुआ। तब वीर तेजाजी ने उसे वचन दिया कि–

“मैं पहले मेणा डाकू से लड़कर अपनी बहन की गायें छुड़ाऊँगा और फिर वापस आकर तुम्हें अपना दंश लेने का अवसर दूँगा।”

तेजाजी की वचनबद्धता पर विश्वास कर नाग उनका रास्ता छोड़ देता है। इसके बाद जंगल में भयंकर युद्ध होता है, जिसमें तेजाजी डाकू मेणा और उसके साथियों को मार गिराते हैं और गायों को छुड़ा लेते हैं। इस युद्ध में उनका पूरा शरीर बुरी तरह घायल हो जाता है। तेजाजी ने अपने साथी के साथ गायों को बहन के घर भेजा और स्वयं घायल अवस्था में अपने वचन को निभाने के लिए नाग के पास लौट आए। जब नाग ने उन्हें इस हाल में देखा तो बोला कि–

“तुम्हारा पूरा शरीर तो घायल है, मैं कहां दंश मारूँ?”

तब तेजाजी महाराज ने अपनी जीभ बाहर निकालकर कहा –

“मेरी जीभ अभी भी सुरक्षित है, तुम इसे डंस लो।”

तेजाजी की वचनबद्धता और साहस को देखकर नाग ने आशीर्वाद दिया कि–

“आज से भाद्रपद शुक्ल दशमी के दिन जो भी सर्पदंश से पीड़ित होगा, वह यदि तुम्हारे नाम का धागा (तांती) बांध ले, तो उस पर किसी विष का कोई प्रभाव नहीं होगा।”

इसके बाद नाग ने तेजाजी की जीभ पर दंश मारा और यह परंपरा तब से चल पड़ी।

तेजा दशमी का पर्व और उससे जुड़ी मान्यताएँ

आज भी मध्यप्रदेश के मालवा-निमाड़ क्षेत्र कई गाँवों में नवमी और दशमी को तेजाजी महाराज (Tejaji Maharaj) के थानों पर बड़ा मेला लगता है।

  • यहाँ बाबा की सवारी (वारा) निकलती है।
  • रोगियों, दुखी और पीड़ितों के धागे खोले जाते हैं।
  • मान्यता है कि तेजा दशमी का व्रत करने से नागदोष और संतान संबंधी कष्ट दूर होते हैं।
  • इस दिन व्रत रखने से घर में संपन्नता और शांति बनी रहती है।
  • महिलाएँ विशेष रूप से इस व्रत को अपने परिवार की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य के लिए करती हैं।
  • नागदोष से मुक्ति और संतान पर संकट दूर करने के लिए उनकी पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।
  • शाम को बाबा की प्रसादी (चूरमा) और विशाल भंडारा होता है।

हजारों की संख्या में श्रद्धालु नारियल चढ़ाने और प्रसादी ग्रहण करने आते हैं। इस प्रकार तेजादशमी का पर्व केवल राजस्थान और मध्यप्रदेश में ही नहीं, बल्कि पूरे भारत के अनेक प्रदेशों में आस्था, विश्वास और श्रद्धा का प्रतीक बनकर मनाया जाता है।

निष्कर्ष

तेजा दशमी 2025 का पर्व 2 सितम्बर को पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। यह दिन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि यह हमें सत्य, वचनबद्धता और धर्मनिष्ठा जैसे मूल्यों की भी याद दिलाता है। तेजाजी महाराज केवल लोकदेवता ही नहीं, बल्कि साहस, वचनबद्धता और धर्मपालन के प्रतीक हैं| उनकी कथा हमें यह सिखाती है कि वचन और धर्म की रक्षा के लिए चाहे कितनी भी बड़ी कठिनाई क्यों न हो, उससे पीछे नहीं हटना चाहिए। इस दिन व्रत और पूजा करने से हमारे पारिवारिक जीवन में सुख-समृद्धि आती है और संतान की रक्षा होती है।

इसलिए इस वर्ष तेजा दशमी के पावन अवसर पर आप भी पूर्ण श्रद्धा-भाव से व्रत और पूजा करें और अपने जीवन को आस्था और सकारात्मकता से भरें।

“साँपों के देवता वीर तेजाजी महाराज की जय!”

“तेजाजी महाराज की कृपा से आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहे। तेजा दशमी की हार्दिक शुभकामनाएँ!”

सामान्य प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1. तेजा दशमी 2025 कब है?
उत्तर:  तेजा दशमी 2025 का पर्व 2 सितम्बर, मंगलवार को मनाया जाएगा। यह तिथि भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर आती है।

प्रश्न 2. तेजा दशमी किसकी पूजा के लिए मनाई जाती है?
उत्तर: यह लोकदेवता वीर तेजाजी महाराज की पूजा के लिए मनाई जाती है। उन्हें नागों के देवता और लोक रक्षक भी माना जाता है।

प्रश्न 3. तेजा दशमी का व्रत क्यों किया जाता है?
उत्तर: इस दिन महिलाएँ उपवास रखती हैं और भगवान तेजाजी की पूजा करती हैं। यह व्रत संतान की लंबी आयु, पारिवारिक सुख-समृद्धि और संकट निवारण के लिए किया जाता है।

प्रश्न 4. तेजा दशमी की पूजा कैसे की जाती है?
उत्तर: सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें, भगवान तेजाजी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें, पूजा सामग्री अर्पित करें, कथा सुनें और शाम को व्रत का समापन करें।

प्रश्न 5. तेजा दशमी का महत्व क्या है?
उत्तर: मान्यता है कि इस व्रत को करने से नागदोष का निवारण होता है, संतान संबंधी कष्ट दूर होते हैं और घर में सुख-शांति बनी रहती है।

Share and Enjoy !

Shares

Tags:

We will be happy to hear your thoughts

Leave a reply

All In One Thoughts
Logo