दशामाता 2025: दशा माता व्रत कब और कैसे किया जाता है? जानिए पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और पौराणिक कथा

दशामाता 2025 (Dasha Mata 2025)

हमारे हिंदू धर्म में प्रत्येक व्रत और त्योहार का एक विशेष महत्व होता है। इन व्रतों में से एक सबसे महत्वपूर्ण व्रत है दशा माता का व्रत, यह व्रत सुख-समृद्धि और पारिवारिक शांति के लिए रखा जाता है। इस व्रत को विशेष रूप से महिलाएं करती है और यह गृहस्थ जीवन की उन्नति के लिए अत्यंत ही शुभ माना जाता है|
यहाँ, हम जानेंगे दशामाता कौन है? दशामाता 2025 व्रत का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इसकी पौराणिक कथा के बारे में |

 

दशामाता कौन है? (Who is Dasha Mata?)

दशा माता हिंदू धर्म में अधिक पूजनीय देवी हैं, जिनकी उपासना ख़ास रूप से घर में सुख-समृद्धि, पारिवारिक शांति और आर्थिक उन्नति के लिए की जाती है। दशा माता को ग्रह दशाओं और जीवन में आने वाली कठिनाइयों को दूर करने वाली देवी के रूप में जाना जाता है। दशा माता को भगवान विष्णु की शक्ति का स्वरूप भी माना जाता है।

दशा माता व्रत 2025 कब है? (When is 2025 Dasha Mata Vrat?)

दशामाता व्रत चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को किया जाता है। इस व्रत को करने से परिवार पर आई हुई विपत्तियां या चल रही विपत्तियां टल जाती हैं और गृहस्थ जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। 2025 दशामाता का व्रत 25 मार्च सोमवार को रखा जाएगा|

दशामाता 2025 व्रत तिथि एवं शुभ मुहूर्त (Dasha Mata Vrat 2025 Date & Muhurat)

व्रत तिथि– 24 मार्च 2025
दशमी तिथि आरंभ समय – 24 मार्च 2025 को सुबह 5 बजकर 39 मिनिट पर होगा
दशमी तिथि समाप्ति – 25 मार्च 2025 को सुबह 5 बजकर 05 मिनिट पर होगी

यह व्रत सूर्योदय के समय रखा जाता है और व्रती दिनभर उपवास रखकर नियमानुसार पूजा-अर्चना करते हैं।

दशा माता का स्वरूप

दशामाता को सौम्य और करुणामयी देवी के रूप में चित्रित किया जाता है।
वे पीले रंग के वस्त्र धारण करती हैं, जो समृद्धि का प्रतीक है।
उनके हाथों में कमल, कलश और अभय मुद्रा होती है, जो जीवन में शांति और सुरक्षा प्रदान करने का संकेत देती हैं।
कई स्थानों पर इन्हें पीपल के वृक्ष का स्वरूप भी माना जाता है और इसलिए दशा माता की पूजा में पीपल वृक्ष की विशेष भूमिका होती है।

 

दशा माता व्रत की पूजा विधि (Dasha Mata Vrat Puja Vidhi)

पूजन सामग्री:

पीले रंग के वस्त्र
हल्दी, अक्षत, रोली, कुमकुम
कलश और आम के पत्ते
फल-फूल, मिठाई
दशा माता की तस्वीर या मूर्ति
चौकी और पीला वस्त्र
जल से भरा कलश
पीपल के पत्ते

पूजन विधि:

  • स्नान और संकल्प– व्रती को प्रातः स्नान कर पीले वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद व्रत का संकल्प लें।
  • कलश स्थापना– एक पीले वस्त्र पर कलश की स्थापना करें और आम के पत्ते लगाएं।
  • दशा माता की पूजा– दशा माता की प्रतिमा या चित्र के सामने हल्दी, कुमकुम, पीले फूल, फल और अक्षत अर्पित करें।
  • पिपल वृक्ष का पूजन– इस दिन पीपल के वृक्ष की परिक्रमा करते हुए जल अर्पण करें और दशामाता व्रत कथा का पाठ करें।
  • भोग अर्पण– इस दिन खीर, हलवा और पूड़ी का दशा माता को भोग लगाएं।
  • व्रत कथा सुनें– दशा माता की पौराणिक कथा सुनें और दूसरों को भी सुनाएं।
  • दान-पुण्य करें– अंत में गरीबों और ब्राह्मणों को दान दें और सुख-समृद्धि की कामना करें।

दशामाता की पूजा का महत्व

  • दशा माता की पूजा करने से ग्रह दोषों का निवारण होता है और परिवार में सुख-शांति एवं समृद्धि बनी रहती है। ऐसा माना जाता है कि जीवन में आई प्रतिकूल परिस्थितियों और बुरी दशाओं को दशामाता कृपा से दूर कर सकती हैं।
  • जिन लोगों की कुंडली में ग्रह दशाएं प्रतिकूल होती हैं, वे यदि दशा माता का सच्चे मन से व्रत और पूजा-पाठ करें, तो उनके जीवन में सकारात्मकता आती हैं।
  • विशेष रूप से महिलाएं इस व्रत को गृहस्थ सुख और आर्थिक स्थिरता के लिए रखती हैं।

दशामाता व्रत की दिव्य कथा (Dasha Mata Vrat Ki Pavitra Katha)

प्राचीन समय की बात है। एक नगर में एक धनी सेठ और उसकी पत्नी रहते थे। वे दोनों बड़े ही धार्मिक और दयालु प्रवृत्ति के थे, लेकिन अचानक उनकी आर्थिक स्थिति खराब होने लगी। सेठ के व्यापार में भारी नुकसान हुआ, घर में अन्न तक समाप्त हो गया और वे अत्यंत दुःखी रहने लगे।

तो सेठानी जी इस परिस्थिति से बहुत परेशान थी। उसने अपने परिवार की दशा सुधारने के लिए कई सारे व्रत-उपवास किए, परन्तु कोई लाभ नहीं हुआ। एक दिन वह एक संत महात्मा के पास गई और अपनी समस्या बताई।

तब महात्मा जी ने कहा –
“बेटी! तुम्हारी यह हालत तुम्हारे घर की दशा बिगड़ने के कारण हुई है। यदि तुम चैत्र कृष्ण पक्ष की दशमी के दिन दशा माता का व्रत करो और पीपल के वृक्ष की पूजा करोगी, तो तुम्हारे घर की सभी विपत्तियाँ पल में दूर हो जाएंगी और फिर से सुख-समृद्धि लौट आएगी।”

यह सुनकर सेठानी ने संकल्प लिया कि वह दशा माता व्रत विधिपूर्वक करेगी, फिर सेठानी ने विधिपूर्वक दशामाता का व्रत किया, पीपल के पेड़ की पूजा की और सारे नियमों का पालन किया| कुछ ही दिनों में उनके घर की दशा बदलने लगी, आर्थिक तंगी समाप्त हो गई और परिवार में सुख-शांति लौटकर आई।

यह देखकर गांव की अन्य महिलाओं ने भी व्रत करना शुरू कर दिया, जिससे उनके जीवन में भी खुशहाली और समृद्धि आई।

दशामाता व्रत के लाभ (Dasha Mata Vrat Benefits)

ग्रह दोषों का निवारण
परिवार में सुख-शांति
आर्थिक उन्नति और व्यवसाय में वृध्दि
अचानक आई विपत्तियों से रक्षा
पति की दीर्घायु और संतान सुख

महत्वपूर्ण बातें (Important Tips)

व्रत के दौरान पीले रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है।
इस दिन पीपल की पूजा करना आवश्यक है।
व्रत करने वाले को सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए।
सूर्यास्त से पहले ही भोजन कर लेना चाहिए।
दशा माता की कथा जरूर सुननी या पढ़नी चाहिए।

 

निष्कर्ष

दशामाता व्रत एक अत्यंत ही प्रभावशाली व्रत है, जो गृहस्थ जीवन में सुख-समृद्धि, आर्थिक उन्नति और बाधाओं से मुक्ति दिलाता है। यह व्रत विशेष रूप से महिलाओं द्वारा किया जाता है और इसकी विधि सरल होने के कारण इसे हर कोई आसानी से कर सकता है। दशामाता 2025 का व्रत शुभ मुहूर्त पर विधिपूर्वक करने से निश्चित ही लाभ प्राप्त होगा। दशा माता ग्रह दशाओं और जीवन की कठिनाइयों को दूर करने वाली देवी हैं। उनकी पूजा और व्रत से घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। यदि आप भी जीवन में शांति, उन्नति और सकारात्मक ऊर्जा चाहते हैं, तो दशा माता की विधिपूर्वक आराधना जरुर करें।

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