दिवाली 2026 कब है 8 या 9 नवंबर? जानें सही तारीख, लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

भारत में दिवाली यानी दीपावली का त्योहार बड़े उत्साह और खुशी के साथ मनाया जाता है। यह रोशनी, खुशियों और सुख-समृद्धि का पर्व है। इस दिन लोग अपने घरों की सफाई करते हैं, रंग-बिरंगी रंगोली बनाते हैं, दीपक जलाते हैं और पूरे घर को सजाते हैं। शाम के समय माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि दिवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।

साल 2026 में दिवाली की तारीख को लेकर लोगों के मन में थोड़ा असमंजस है। कई लोग जानना चाहते हैं कि इस बार दिवाली 8 नवंबर को मनाई जाएगी या 9 नवंबर को। इसके साथ ही लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा और पूजा करने का सही समय कौन-सा होगा?

अगर आप भी (Diwali 2026 Date) दिवाली 2026 की सही तारीख, लक्ष्मी पूजन 2026 का शुभ समय और पूजा की सरल विधि जानना चाहते हैं, तो इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ें। यहां आपको दिवाली की तारीख, अमावस्या तिथि, पूजा सामग्री, घर पर लक्ष्मी-गणेश पूजन की आसान विधि और दीपावली से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं की पूरी जानकारी सरल भाषा में मिलेगी।

दिवाली 2026 कब है? 8 या 9 नवंबर?

साल 2026 में दिवाली का त्योहार रविवार, 8 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार दिवाली कार्तिक महीने की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है। इस साल अमावस्या तिथि 8 नवंबर को शुरू होगी और 9 नवंबर को दोपहर में समाप्त होगी।

इसी वजह से कई लोगों के मन में सवाल है कि दिवाली 8 नवंबर को मनाई जाएगी या 9 नवंबर को। आपको बता दें कि दिवाली की मुख्य पूजा 8 नवंबर की शाम को की जाएगी, क्योंकि इस दिन शाम के समय अमावस्या तिथि रहेगी। इसी समय माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करने की परंपरा है।

दिवाली की शाम घरों को दीपों से सजाया जाता है और माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन मां लक्ष्मी का आशीर्वाद मिलने से परिवार में खुशहाली, शांति और समृद्धि बनी रहती है।

दिवाली 2026 की मुख्य जानकारी

  • दिवाली की तारीख: 8 नवंबर 2026
  • दिन: रविवार
  • हिंदू तिथि: कार्तिक अमावस्या
  • मुख्य पूजा: माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा
  • पूजा का समय: शाम का प्रदोष काल
  • त्योहार का महत्व: सुख, शांति, खुशहाली और समृद्धि

इसलिए अगर आप दिवाली की पूजा की तैयारी कर रहे हैं, तो 8 नवंबर 2026 की शाम को ध्यान में रखें।

दिवाली 2026 में अमावस्या तिथि कब शुरू और समाप्त होगी?

दीपावली का त्योहार हिंदू पंचांग की अमावस्या तिथि के अनुसार मनाया जाता है। साल 2026 में अमावस्या तिथि 8 नवंबर को शुरू होगी और 9 नवंबर को समाप्त होगी।

द्रिक पंचांग के अनुसार:

  • अमावस्या तिथि प्रारंभ: 8 नवंबर 2026, सुबह 11:27 बजे।
  • अमावस्या तिथि समाप्त: 9 नवंबर 2026, दोपहर 12:31 बजे।

अमावस्या तिथि के दौरान ही दीपावली का मुख्य पूजन किया जाता है। चूंकि 8 नवंबर की शाम को प्रदोष काल में अमावस्या तिथि रहेगी, इसलिए इसी दिन लक्ष्मी पूजन करना शुभ माना गया है।

ध्यान रखें कि हिंदू पंचांग में तिथि का निर्धारण केवल अंग्रेजी कैलेंडर की तारीख से नहीं, बल्कि चंद्रमा और सूर्य की खगोलीय स्थिति से होता है। इसलिए किसी तिथि का प्रारंभ और समापन एक ही अंग्रेजी तारीख पर होना आवश्यक नहीं है।

दिवाली 2026 में लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त

दीपावली पर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि शुभ मुहूर्त में पूरे विधि-विधान से पूजा करने पर घर में खुशहाली, शांति और धन-समृद्धि आती है। इसी वजह से पूजा शुरू करने से पहले सही मुहूर्त की जानकारी लेना जरूरी होता है।

द्रिक पंचांग के अनुसार, भोपाल (मध्य प्रदेश) में दिवाली 2026 के लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त इस प्रकार है:

  • लक्ष्मी पूजन 2026: शुभ समय और तारीख
  • लक्ष्मी पूजन की तारीख: 8 नवंबर 2026
  • दिन: रविवार
  • लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त: शाम 6:02 बजे से रात 8:01 बजे तक
  • प्रदोष काल: शाम 5:38 बजे से रात 8:13 बजे तक
  • वृषभ काल: शाम 6:02 बजे से रात 8:01 बजे तक
  • अमावस्या तिथि शुरू: 8 नवंबर 2026, सुबह 11:27 बजे
  • अमावस्या तिथि समाप्त: 9 नवंबर 2026, दोपहर 12:31 बजे

प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजा क्यों की जाती है?

दिवाली के दिन शाम के समय माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करने की परंपरा है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष काल में पूजा करना शुभ माना जाता है।

प्रदोष काल क्या होता है?

प्रदोष काल शाम का वह समय होता है, जो सूर्यास्त के आसपास शुरू होता है। इस समय को पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों के लिए विशेष माना जाता है।
दिवाली पर जब कार्तिक अमावस्या तिथि के दौरान प्रदोष काल होता है, तब माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है।

वृषभ लग्न का क्या महत्व है?

लक्ष्मी पूजन के लिए वृषभ लग्न को भी शुभ माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र में वृषभ को स्थिर लग्न कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस समय माता लक्ष्मी की पूजा करने से घर में सुख, शांति और धन-समृद्धि बनी रहती है।

इसी वजह से दिवाली पर शाम के समय माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करने की परंपरा है।

दिवाली लक्ष्मी पूजन के लिए आवश्यक सामग्री

दिवाली पर पूजा करने से पहले सभी आवश्यक सामग्री एकत्रित कर लेनी चाहिए। इससे पूजा के समय किसी वस्तु की कमी नहीं होती और पूजा व्यवस्थित तरीके से संपन्न होती है।

लक्ष्मी पूजन सामग्री की सूची:

  • माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा या तस्वीर।
  • मां सरस्वती की प्रतिमा या तस्वीर।
  • लाल या पीला कपड़ा।
  • पूजा की चौकी।
  • रोली और कुमकुम।
  • हल्दी और अक्षत (चावल)।
  • चंदन और सिंदूर।
  • फूल और फूलों की माला।
  • कमल का फूल, यदि उपलब्ध हो।
  • धूप और अगरबत्ती।
  • घी और दीपक।
  • रुई की बाती।
  • कपूर।
  • कलश और शुद्ध जल।
  • पान और सुपारी।
  • फल और मिठाई।
  • नारियल।
  • पंचामृत।
  • गंगाजल।
  • सिक्के और पूजा के लिए कुछ धनराशि।
  • खील और बताशे।
  • मिठाई और नैवेद्य।

इन सामग्रियों के साथ अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार अन्य वस्तुएं भी रख सकते हैं।

दिवाली 2026 में लक्ष्मी पूजन की सरल विधि (Diwali 2026 Laxmi Pooja ki vidhi)

दिवाली के दिन माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करना बहुत शुभ माना जाता है। अगर आप भी घर पर आसान तरीके से लक्ष्मी पूजन करना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए चरणों का पालन कर सकते हैं।

1. घर और पूजा स्थान की सफाई करें

दिवाली से पहले अपने पूरे घर की अच्छी तरह सफाई करें। इसके बाद पूजा करने वाली जगह को साफ करके वहां एक चौकी रखें। चौकी पर लाल या पीले रंग का साफ कपड़ा बिछाएं।

2. माता लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्ति रखें

अब चौकी पर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। आप चाहें तो मां सरस्वती की तस्वीर भी रख सकते हैं। सभी मूर्तियों को साफ कपड़े से पोंछकर सही तरीके से रखें।

3. दीपक और कलश जलाएं और स्थापित करें

पूजा की शुरुआत में एक कलश में साफ पानी भरकर रखें। परंपरा के अनुसार कलश में आम के पत्ते और ऊपर नारियल भी रखा जाता है। इसके बाद घी का दीपक जलाएं और धूप-अगरबत्ती लगाएं।

4. सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा करें

हिंदू धर्म में किसी भी शुभ काम से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है। इसलिए सबसे पहले गणेश जी को फूल, दूर्वा, रोली और चावल चढ़ाएं।

इसके बाद इस मंत्र का जाप करें:

ॐ गं गणपतये नमः।

5. माता लक्ष्मी की पूजा करें

अब माता लक्ष्मी को फूल, माला, कुमकुम, अक्षत और मिठाई चढ़ाएं। माता के सामने घी का दीपक जलाएं और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करें।

इसके बाद माता लक्ष्मी के इस मंत्र का जाप करें:

ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।

मंत्र जाप के बाद माता लक्ष्मी की आरती करें।

6. मां सरस्वती और कुबेर जी की पूजा करें

दिवाली के दिन कई परिवार मां सरस्वती और भगवान कुबेर की भी पूजा करते हैं। मां सरस्वती को ज्ञान और विद्या की देवी माना जाता है, जबकि भगवान कुबेर को धन का देवता माना जाता है। आप अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार इनकी पूजा भी कर सकते हैं।

7. माता लक्ष्मी को भोग लगाएं

पूजा के दौरान माता लक्ष्मी और भगवान गणेश को फल, मिठाई, खील, बताशे और अन्य प्रसाद चढ़ाएं। इसके बाद पूरे परिवार के साथ मिलकर आरती करें और सभी को प्रसाद बांटें।

8. पूरे घर में दीपक जलाएं

लक्ष्मी पूजन के बाद घर के मुख्य दरवाजे, खिड़कियों, बालकनी और आंगन में दीपक जलाएं। इससे पूरा घर रोशनी से जगमगा उठता है।

दिवाली पर दीपक जलाना अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है।

इस तरह आप दिवाली 2026 पर घर में माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा आसानी से कर सकते हैं। पूजा करते समय साफ-सफाई रखें और पूरे परिवार के साथ श्रद्धा और खुशी से इस त्योहार को मनाएं।

दीपावली से जुड़ी पौराणिक मान्यताएं और कथाएं

दिवाली का त्योहार सिर्फ दीपक जलाने और खुशियां मनाने तक ही सीमित नहीं है। इस पर्व के पीछे कई पौराणिक कथाएं और धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। इन कथाओं से 1.हमें अच्छाई की जीत, बुराई का अंत और जीवन में खुशियों का महत्व समझने को मिलता है।

आइए जानते हैं दिवाली से जुड़ी कुछ प्रमुख पौराणिक कथाओं के बारे में।

1. भगवान श्रीराम की अयोध्या वापसी

दिवाली से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध कथा भगवान श्रीराम की है। रामायण के अनुसार, भगवान श्रीराम ने 14 साल का वनवास पूरा किया था। इस दौरान उन्होंने रावण का वध किया और माता सीता तथा भाई लक्ष्मण के साथ अयोध्या वापस लौटे।

भगवान श्रीराम के अयोध्या आने की खुशी में वहां के लोगों ने पूरे नगर को दीपकों से सजाया और उनका स्वागत किया।

तभी से हर साल दिवाली पर लोग अपने घरों में दीपक जलाते हैं और इस दिन को खुशी के साथ मनाते हैं। यह कथा हमें सिखाती है कि अंत में हमेशा अच्छाई और सच्चाई की जीत होती है।

2. समुद्र मंथन से माता लक्ष्मी का प्राकट्य

पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया था। इस मंथन से कई अनमोल चीजें निकलीं। इसी दौरान माता लक्ष्मी भी प्रकट हुई थीं।

माता लक्ष्मी को धन, सुख, वैभव और समृद्धि की देवी माना जाता है। इसलिए दिवाली के दिन उनकी विशेष पूजा की जाती है।

लोग माता लक्ष्मी से प्रार्थना करते हैं कि उनके घर में हमेशा सुख-शांति बनी रहे और परिवार में धन-समृद्धि आए।

3. भगवान श्रीकृष्ण और नरकासुर की कथा

दिवाली से एक दिन पहले छोटी दिवाली मनाई जाती है, जिसे नरक चतुर्दशी भी कहा जाता है। इस दिन से भगवान श्रीकृष्ण और नरकासुर की एक पौराणिक कथा जुड़ी हुई है।

मान्यता के अनुसार, नरकासुर नाम का एक असुर लोगों को बहुत परेशान करता था। उसके अत्याचारों से सभी दुखी थे। तब भगवान श्रीकृष्ण ने उसका वध करके लोगों को उसके डर और अत्याचारों से मुक्ति दिलाई।

इस खुशी में लोगों ने दीपक जलाए और उत्सव मनाया। इसी घटना की याद में नरक चतुर्दशी मनाई जाती है।

4. भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का महत्व

हिंदू धर्म में भगवान विष्णु को संसार का पालन करने वाला देवता माना जाता है, जबकि माता लक्ष्मी को धन और समृद्धि की देवी कहा जाता है।

माता लक्ष्मी को भगवान विष्णु की पत्नी माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जहां भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा होती है, वहां सुख, शांति और खुशहाली बनी रहती है।

इसी वजह से दिवाली के दिन लोग माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करते हैं और अपने परिवार की तरक्की, सुख-शांति तथा समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं।

इन सभी पौराणिक कथाओं से हमें यही सीख मिलती है कि जीवन में हमेशा सच्चाई, अच्छाई और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए। दिवाली का त्योहार हमें प्रेम, खुशियां और आपसी भाईचारे का संदेश भी देता है।

दिवाली का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व

दिवाली का त्योहार हमें जीवन में प्यार, शांति और सकारात्मक सोच बनाए रखने का संदेश देता है। इस पर्व पर जलने वाले दीपक हमें सिखाते हैं कि अंधेरा कितना भी हो, रोशनी की एक छोटी-सी किरण उसे दूर कर सकती है।

दिवाली के धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व को हम इन बातों से समझ सकते हैं:

  • अंधकार पर प्रकाश की जीत: दीपक जलाना ज्ञान, उम्मीद और अच्छी सोच का प्रतीक माना जाता है।
  • बुराई पर अच्छाई की जीत: भगवान श्रीराम की कहानी हमें सिखाती है कि हमेशा सच्चाई और धर्म के रास्ते पर चलना चाहिए।
  • सुख-समृद्धि की कामना: माता लक्ष्मी की पूजा करके लोग अपने परिवार की सुख-शांति और तरक्की की प्रार्थना करते हैं।
  • परिवार का साथ: दिवाली पर परिवार के सभी लोग मिलकर पूजा करते हैं और त्योहार की खुशियां मनाते हैं।
  • दूसरों की मदद करना: जरूरतमंद लोगों को दान देना, उनकी सहायता करना और उनके साथ खुशियां बांटना भी दिवाली का एक खास संदेश है।

दिवाली 2026 पर क्या करें और क्या न करें?

दिवाली खुशियों, रोशनी और अच्छे कामों का त्योहार है। इस दिन कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर हम त्योहार को और भी अच्छा बना सकते हैं।

दिवाली पर क्या करें?

  • घर और पूजा की जगह को अच्छी तरह साफ रखें।
  • माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूरे मन से पूजा करें।
  • घर के मुख्य दरवाजे पर दीपक जलाएं।
  • गरीब और जरूरतमंद लोगों को भोजन, कपड़े या अपनी क्षमता के अनुसार दान दें।
  • परिवार और दोस्तों के साथ मिलकर त्योहार की खुशियां मनाएं।
  • पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए दिवाली मनाएं।
  • घर के बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लें।

दिवाली पर क्या न करें?

  • किसी से लड़ाई-झगड़ा या बहस न करें।
  • घर और आसपास गंदगी न फैलाएं।
  • बहुत ज्यादा पटाखे न जलाएं।
  • खाना, मिठाई और दूसरी चीजें बेकार न करें।
  • पटाखों से पशु-पक्षियों और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाएं।
  • पूजा करते समय जल्दबाजी न करें और शांति से पूजा करें।

याद रखें: दिवाली का मतलब सिर्फ दीपक जलाना और मिठाइयां बांटना नहीं है, बल्कि अपनों के साथ खुशियां बांटना, जरूरतमंदों की मदद करना और सभी के जीवन में प्रेम और सकारात्मकता लाना भी है।

दिवाली 2026 की शुभकामनाएं (Diwali 2026 Wishes in Hindi)

दीपावली का त्योहार अपनों के साथ खुशियां बांटने का खास अवसर है। इस दिन लोग एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं और सुख, शांति व समृद्धि की कामना करते हैं।

आप अपने परिवार, दोस्तों और रिश्तेदारों को ये दिवाली संदेश भेज सकते हैं:

  • दीपों का यह पावन पर्व आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आए। शुभ दीपावली 2026!
  • मां लक्ष्मी की कृपा आप और आपके परिवार पर हमेशा बनी रहे। आपको और आपके परिवार को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं!
  • आपके जीवन से सभी परेशानियां दूर हों और खुशियों का प्रकाश हमेशा बना रहे। हैप्पी दिवाली 2026!
  • इस दिवाली आपके घर में खुशियों की बहार आए और हर दिन नई उम्मीद लेकर आए। शुभ दीपावली 2026!
  • दीपावली के पावन अवसर पर आपके सभी सपने पूरे हों और जीवन तरक्की से भरा रहे।
  • आपके घर का हर कोना दीपों से रोशन हो और परिवार में हमेशा प्यार और खुशियां बनी रहें।
  • रोशनी का यह त्योहार आपके जीवन में नई उमंग, नई उम्मीद और सफलता लेकर आए। दीपावली की शुभकामनाएं 2026!
  • मां लक्ष्मी और भगवान गणेश का आशीर्वाद आपके परिवार पर बना रहे। आपका जीवन सुख और समृद्धि से भरा रहे।
  • इस दिवाली आपके जीवन में खुशियों के नए दरवाजे खुलें और हर काम में सफलता मिले।
  • आपके चेहरे पर मुस्कान, घर में खुशहाली और जीवन में शांति बनी रहे। आपको दिवाली की ढेर सारी शुभकामनाएं!
  • दीपों की रोशनी आपके जीवन के हर अंधेरे को दूर करे और खुशियों से आपका आंगन भर दे।
  • यह दिवाली आपके लिए ढेर सारी खुशियां, अच्छा स्वास्थ्य और सफलता लेकर आए। शुभ दीपावली 2026!
  • अपनों का साथ और खुशियों की सौगात हमेशा आपके साथ रहे। आपका दिवाली का त्योहार मंगलमय हो!
  • इस पावन पर्व पर आपके घर में सुख-शांति का वास हो और जीवन में हमेशा खुशहाली बनी रहे।
  • दिवाली के इन खूबसूरत पलों में आपके हर दिन की शुरुआत मुस्कान से हो और हर शाम खुशियों के साथ बीते। हैप्पी दिवाली 2026!

निष्कर्ष – Diwali 2026

(Diwali 2026) दिवाली 2026 का त्योहार रविवार, 8 नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन कार्तिक अमावस्या के अवसर पर लोग माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करेंगे।

भोपाल में लक्ष्मी पूजन का शुभ समय शाम 6:02 बजे से रात 8:01 बजे तक रहेगा। अमावस्या तिथि 9 नवंबर को दोपहर तक रहेगी, लेकिन दिवाली की मुख्य पूजा 8 नवंबर की शाम को ही की जाएगी।

इस खास दिन अपने घर को साफ-सुथरा रखें, दीपक जलाएं और परिवार के साथ मिलकर पूजा करें। साथ ही जरूरतमंद लोगों की मदद करें और उनके साथ त्योहार की खुशियां बांटें।

आप सभी को दिवाली 2026 की हार्दिक शुभकामनाएं! मां लक्ष्मी और भगवान गणेश आपके जीवन में सुख, शांति, खुशहाली और समृद्धि बनाए रखें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. साल 2026 में दिवाली किस तारीख को मनाई जाएगी?

साल 2026 में दिवाली रविवार, 8 नवंबर को मनाई जाएगी। इस दिन शाम को माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाएगी।

2. दिवाली 8 नवंबर को मनाई जाएगी या 9 नवंबर को?

दिवाली का मुख्य त्योहार 8 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन शाम के प्रदोष काल में अमावस्या तिथि रहने के कारण लक्ष्मी पूजन किया जाएगा।

3. दिवाली 2026 में लक्ष्मी पूजा का शुभ समय क्या रहेगा?

भोपाल के द्रिक पंचांग के अनुसार, 8 नवंबर को लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त शाम 6:02 बजे से रात 8:01 बजे तक रहेगा।

4. साल 2026 में अमावस्या तिथि कब शुरू होगी?

कार्तिक अमावस्या तिथि 8 नवंबर 2026 को सुबह 11:27 बजे से शुरू होगी।

5. दिवाली 2026 की अमावस्या तिथि कब खत्म होगी?

अमावस्या तिथि 9 नवंबर 2026 को दोपहर 12:31 बजे समाप्त होगी।

6. दिवाली के दिन किन देवी-देवताओं की पूजा की जाती है?

दिवाली पर मुख्य रूप से धन और सुख-समृद्धि की देवी माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा होती है। कुछ परिवारों में माता सरस्वती और भगवान कुबेर की पूजा करने की भी परंपरा है।

7. घर पर दिवाली की लक्ष्मी पूजा किस तरह करें?

सबसे पहले घर और पूजा की जगह को साफ करें। फिर चौकी पर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। दीपक जलाकर फूल, रोली, अक्षत और मिठाई चढ़ाएं। इसके बाद मंत्रों का जाप करें और आरती करके पूजा पूरी करें।

8. दिवाली पर दीपक जलाने की परंपरा क्यों है?

दिवाली पर दीपक जलाना अंधकार को दूर करके रोशनी फैलाने का प्रतीक है। इसे ज्ञान, उम्मीद और बुराई पर अच्छाई की जीत से भी जोड़कर देखा जाता है।

9. दीपावली पर माता लक्ष्मी की पूजा करने का क्या महत्व है?

धार्मिक मान्यता के अनुसार माता लक्ष्मी धन और समृद्धि की देवी हैं। दिवाली पर उनकी पूजा करके भक्त अपने परिवार के लिए सुख, शांति, खुशहाली और तरक्की की प्रार्थना करते हैं।

10. दीपावली मनाने के पीछे क्या मान्यता है?

एक प्रमुख मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीराम 14 साल का वनवास पूरा करके जब अयोध्या लौटे थे, तब नगरवासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था। इसी खुशी में दीप जलाने की परंपरा को दिवाली से जोड़ा जाता है। इसके अलावा इस त्योहार का संबंध माता लक्ष्मी की पूजा और कई अन्य धार्मिक मान्यताओं से भी है।

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