Hariyali Amavasya 2025 कब है? जानिए तिथि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

प्रस्तावना

Hariyali Amavasya 2025: भारत एक ऐसा सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहरों से समृद्ध देश है, जहाँ हर दिन किसी न किसी पर्व, त्योहार या व्रत के रूप में एक विशेष धार्मिक भावनाओं से जुड़ा होता है। हमारे भारतीय पंचांग में हर तिथि का अपना विशेष महत्व होता है। इन्हीं महत्वपूर्ण तिथियों में से एक है – हरियाली अमावस्या, जिसे विशेष रूप से प्रकृति प्रेम, हरियाली के संरक्षण और धार्मिक पूजन के लिए जाना जाता है। यह दिन सावन मास की अमावस्या तिथि को आता है और इसे श्रावण अमावस्या या सावन अमावस्या भी कहा जाता है।

हरियाली अमावस्या का नाम ही इस बात का संकेत देता है कि यह पर्व प्रकृति की हरियाली, वर्षा ऋतु की शुभता और पर्यावरण के प्रति श्रद्धा भाव से जुड़ा है। यह दिन धार्मिक दृष्टि से तो महत्वपूर्ण है ही, साथ ही पर्यावरण संरक्षण, पौधारोपण और सामूहिक उत्सवों के लिए भी एक विशेष अवसर माना जाता है। भारत के विभिन्न राज्यों जैसे उत्तर भारत, राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में इसे बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।

हरियाली अमावस्या पर नदी स्नान, पीपल व तुलसी की पूजा, व्रत, दान-पुण्य, कथा वाचन और देवी-देवताओं का पूजन किया जाता है। साथ ही, महिलाएं इस दिन व्रत रखती हैं और भगवान शिव एवं माता पार्वती की पूजा करके अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। इस दिन नवविवाहित महिलाएं अपने मायके जाती हैं और अपने परिजनों के साथ प्रकृति के सान्निध्य में पर्व मनाती हैं।

साल 2025 में हरियाली अमावस्या कब है (Hariyali Amavasya 2025), इसका शुभ मुहूर्त क्या है, और इस दिन कौन-कौन से धार्मिक एवं सामाजिक कार्य किए जाते हैं – आइए अब हम जानेंगे इन सभी बातों को विस्तारपूर्वक, जिससे यह पावन पर्व हमारे जीवन में अधिक सकारात्मकता और आध्यात्मिक ऊर्जा ला सके।

हरियाली अमावस्या 2025 की तिथि और समय (Hariyali Amavasya 2025 Date and Time)

अमावस्या तिथि की शुरुआत:
24 जुलाई 2025 (गुरुवार), रात 2:28 बजे से
अमावस्या तिथि का समापन:
25 जुलाई 2025 (शुक्रवार), दोपहर 12:40 बजे तक

उदया तिथि के अनुसार यह पर्व 24 जुलाई 2025 को मनाया जाएगा।

हरियाली अमावस्या 2025 का शुभ मुहूर्त (Hariyali Amavasya 2025 Shubh Muhurat)

शुभ मुहूर्त और समय

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:15 बजे से 4:57 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त का समय: दोपहर 12:00 बजे से 12:55 बजे तक निर्धारित है।
  • अमृत काल दोपहर: 2:26 बजे से 3:58 बजे तक
  • सर्वार्थ सिद्धि योग: पूरे दिन रहेगा
  • गुरु पुष्य योग का समय: 4:43 PM से अगले दिन 5:39 AM तक रहेगा।

शुभ योगों के दौरान व्रत, पूजन, दान और पौधारोपण करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और पुण्य की वृद्धि होती है।

इस प्रकार, हरियाली अमावस्या का व्रत, पूजन और धार्मिक अनुष्ठान 22 जुलाई 2025, मंगलवार को संपन्न किए जाएंगे।

हरियाली अमावस्या का धार्मिक महत्व (Hariyali Amavasya 2025 Religious Significance in Hindi)

हरियाली अमावस्या को सावन अमावस्या भी कहा जाता हैं| यह दिन न केवल पर्यावरण के प्रति जागरूकता का प्रतीक है, बल्कि यह एक ऐसा पवित्र पर्व है जो धार्मिक आस्था, संस्कृति और प्रकृति के अद्भुत संगम को दर्शाता है। सावन का महीना पूरे भारत में विशेषकर उत्तर भारत में अत्यधिक शुभ माना जाता है, क्योंकि यह भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना का प्रमुख काल होता है। इस पावन अवसर पर कई प्रकार के धार्मिक अनुष्ठान और सामाजिक आयोजन होते हैं, जो इस पर्व को और भी खास बना देते हैं।

1. प्रकृति की पूजा – धरती माता को समर्पित
हरियाली अमावस्या का मूल भाव प्रकृति के प्रति आभार प्रकट करना है। वर्षा ऋतु में जब धरती हरियाली से आच्छादित हो जाती है, तो यह दिन हमें पेड़ों, पौधों और वनस्पतियों के महत्व की याद दिलाता है। इस दिन विशेष रूप से पीपल, बरगद, तुलसी और अन्य औषधीय पौधों की पूजा की जाती है। वृक्षारोपण करके लोग आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और हरा-भरा वातावरण सुनिश्चित करने का संकल्प लेते हैं। आज के समय में जब जलवायु परिवर्तन और वनों की कटाई जैसी समस्याएं सामने हैं, ऐसे में हरियाली अमावस्या का महत्व और भी बढ़ जाता है।

2. शिव-पार्वती पूजन – वैवाहिक सुख और आशीर्वाद की कामना
सावन मास भगवान शिव को बहुत ही प्रिय है और हरियाली अमावस्या सावन महीने की अमावस्या तिथि को आती है। इस दिन शिव-पार्वती की पूजा का विशेष महत्व होता है। महिलाएं इस दिन व्रत रखती हैं और मंदिरों में जाकर जल, बेलपत्र, दूध और धतूरा चढ़ाकर भगवान शिव को प्रसन्न करती हैं। साथ ही, माता पार्वती की पूजा कर सुखद वे अपने वैवाहिक जीवन की सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की प्रार्थना करती हैं।

नवविवाहित महिलाएं मायके जाकर इस दिन विशेष रीति-रिवाजों से पूजन करती हैं और अपने ससुराल के कल्याण की प्रार्थना करती हैं। यह पर्व स्त्री-शक्ति और उसकी धार्मिक आस्था का भी प्रतीक है।

3. पितृ तर्पण और श्राद्ध – पूर्वजों को श्रद्धांजलि
अमावस्या तिथि को पितृ पूजा का अत्यधिक महत्व होता है। हरियाली अमावस्या के दिन भी लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध कर्म करते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन किया गया पितृ तर्पण विशेष फलदायी होता है और इससे पितृ दोष भी शांत होता है। कई श्रद्धालु इस दिन गंगा नदी या अन्य पवित्र नदियों में स्नान कर पितरों को जल अर्पित करते हैं।

4. सांस्कृतिक आयोजन – उत्सव का रंग
हरियाली अमावस्या सिर्फ एक धार्मिक दिन नहीं, बल्कि लोक-सांस्कृतिक उत्सव का भी प्रतीक है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार के कई क्षेत्रों में इस दिन विशाल मेले, लोकनृत्य, झूले और गीतों का आयोजन होता हैं। महिलाएं पारंपरिक परिधान पहनकर झूले झूलती हैं, मेहंदी लगाती हैं और समूह में लोकगीत गाकर वातावरण को जीवंत बना देती हैं।

  • राजस्थान में, खासकर उदयपुर, कोटा और जयपुर में बड़े मेलों का आयोजन होता है। यहाँ महिलाएं “झूलों का त्योहार” बड़े उत्साह से मनाती हैं।
  • मध्य प्रदेश के उज्जैन, इंदौर और ग्वालियर में धार्मिक मेलों के साथ-साथ भक्ति संगीत, कथा-प्रवचन और भंडारों का आयोजन किया जाता है।
  • उत्तर प्रदेश में, विशेषकर ब्रज क्षेत्र में राधा-कृष्ण की झांकी और झूला महोत्सव के रूप में यह पर्व मनाया जाता है।

यह दिन समाज में सामूहिकता, सौहार्द, और प्रेम की भावना को भी प्रबल करता है, जहाँ लोग धर्म और संस्कृति के माध्यम से एक-दूसरे से जुड़ते हैं।

हरियाली अमावस्या व्रत विधि

इस दिन व्रत और पूजा करने की विधि इस प्रकार है:

1. प्रातः स्नान और संकल्प
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। पवित्र जल में गंगाजल मिलाएं और व्रत का संकल्प लें।

2. भगवान शिव का पूजन
भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, आक, दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल अर्पित करें। “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें।

3. वृक्ष पूजन और रोपण
पीपल, नीम, तुलसी और अन्य औषधीय या फलदार पौधे लगाएँ। वृक्षों की रक्षा का संकल्प लें और उन्हें जल अर्पित करें।

4. पितृ तर्पण
पूर्वजों की आत्मा की शांति हेतु ब्राह्मण भोजन, पिंडदान और तर्पण करें। जल में तिल और कुश डालकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके तर्पण करें।

5. दान-पुण्य
इस दिन गरीबों, ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, छाता, जूते, फल आदि दान करने से विशेष पुण्य मिलता है।

हरियाली अमावस्या के उपाय

इस दिन कुछ खास उपाय करने से जीवन में सुख-शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि आती है:

  • पीपल के वृक्ष पर जल चढ़ाएँ और 7 बार परिक्रमा करें।
  • तुलसी के पौधे में दीपक जलाएं और “ॐ विष्णवे नमः” का जाप करें।
  • गरीब बच्चों को हरे वस्त्र या फल दान करें – इससे ग्रह दोष शांत होते हैं।
  • भगवान शिव को जल चढ़ाकर रुद्राष्टक का पाठ करें – मानसिक तनाव और रोग दूर होते हैं।
  • पति-पत्नी एक साथ मिलकर पौधा लगाएं – इससे वैवाहिक जीवन में प्रेम बना रहता है।

हरियाली अमावस्या से जुड़ी पौराणिक मान्यताएं

पौराणिक कथा के अनुसार, सावन अमावस्या को भगवान शिव ने देवी पार्वती को प्रकृति का महत्व बताया था। तभी से यह दिन हरियाली और प्रकृति को समर्पित माना जाता है।

एक अन्य कथा के अनुसार, सावन अमावस्या के दिन राजा मनु ने सृष्टि की रचना के लिए ब्रह्मा जी से वरदान मांगा था। तभी से यह दिन नई शुरुआत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।

हरियाली अमावस्या पर व्रत एवं पूजा विधि

व्रत कैसे करें:

  • स्नान के बाद साफ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल को साफ करें।
  • घर या मंदिर में शिवलिंग की स्थापना करें और जल, दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें।
  • देवी पार्वती और भगवान शिव का पूजन करें और श्रृंगार सामग्री अर्पित करें।
  • धूप, दीप, पुष्प और नैवेद्य से पूजन करें और अंत में आरती करें।
  • पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाएं, कच्चा सूत बांधें और परिक्रमा करें।

हरियाली अमावस्या पर उपाय और लाभ

इस दिन कुछ सरल उपाय करके आप जीवन में सुख, शांति और समृद्धि ला सकते हैं:

  • तुलसी के पौधे को लगाएं – पारिवारिक कलह दूर होती है।
  • काले तिल और जल से पितरों का तर्पण करें – पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।
  • गरीबों को हरे वस्त्र या हरी सब्जी का दान करें – धन-धान्य की प्राप्ति होती है।
  • वृक्षारोपण – पुण्य की प्राप्ति और पर्यावरण संरक्षण।

किस-किस राज्य में होती है विशेष धूम?

राजस्थान – हरियाली अमावस्या के दिन राज्यभर में मेले, झूला उत्सव, लोक गीत-नृत्य होते हैं।
मध्यप्रदेश – उज्जैन, इंदौर, मंदसौर में पवित्र नदियों के किनारे पूजा और दान-पुण्य होता है।
उत्तर प्रदेश – वृंदावन, मथुरा, अयोध्या में मंदिरों में विशेष पूजा होती है।
उत्तराखंड व हिमाचल – वनों और नदी किनारे हरियाली उत्सव मनाया जाता है।

पर्यावरण के लिए विशेष दिन

हरियाली अमावस्या केवल धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देती है। आज की बढ़ती प्रदूषण और जलवायु संकट के समय में यह दिन लोगों को याद दिलाता है कि हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य में रहना चाहिए।

  • वृक्षारोपण करें
  • पेड़ काटने से बचें
  • प्राकृतिक संसाधनों का दुरुपयोग न करें
  • जल और बिजली की बचत करें

निष्कर्ष

हरियाली अमावस्या ऐसा पर्व है जो धर्म, प्रकृति, संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ता है। वर्ष 2025 में यह अमावस्या 22 जुलाई को पड़ रही है, जो न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय रूप से भी बहुत खास मानी जाती है। इस दिन व्रत रखें, पौधे लगाएं, पितरों का तर्पण करें और अपने जीवन में हरियाली और सकारात्मक ऊर्जा का स्वागत करें।

आपका यह हरियाली अमावस्या 2025 शुभ, पवित्र और फलदायक हो – ऐसी मंगलकामनाएँ!
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